मनक़बत
हुुजुर सययद मीर मोहम्मद अब्दुल वाहिद
व मीर मोहम्मद ताहिर मियां
बिलग्राम शरीफ
हरदोई उत्तर प्रदेश
हम्दे बारी ताआला
इमाम अहमद रजा खां
वही रब है जिसने तुझको हमतन करम बनाया
हमे भीख मांगने तेरा रास्ता बताया
वो कुंवारी पाक मरियम बन सक्त पीह का दम
हे अजब निशाने आजम मगर आमना का जाया
नात शरीफ
सैफ रजा कानपुरी
सर पे नाअलेन आपके होतो
और तैबा में हम खड़े होतो
जिनमें खुश्बू बसी है आका की
वो दरो वार चूमते होतो
करते खिदमत सदा में तौबा की
हम भी तकदीर के बड़े होते
मौत आ जाती उनकी चौखट पर
मुझपे जन्नत में तफसिरे होतो
हश्र तक हमको जिन्दगी मिलती
हश्र तक उनपे वारते होते
दफन होता में उनके रस्ते में
काश वो पांव रख दिये होतो
फिर तो महशर में मेरे सीने पर
नक्श पा आपके बने होतो
सख्तिये हश्र का करूं शिकवा
वो भी सरकार आपके होते
प्यास से में तड़प रहा होता
आप कौसर पिला रहेे होते
पुल पे में होता और आप उधर
रब्बे सल्लिम पुकारते होतो
हम भी होतो लिवा के साये में
लव पे नगमे दुरूद के होतो
आप तशरीफ रखते मीजां पर
फिर गुलामों के फैसले होतो
काश दौरे हुसैन मिल जाता
साथ में करबला गये होतो
हुरमला भी वहीं पे मर जाता
खुलके असगर अगर हंसे होतो
फिर यू जावेद खुल्द में जाता
सर पे नाअलेन आपके होतो
मनक़बत
हजरत मोअज्ज्म रजा साहब
यूं ही नही करती है दुनिया चर्चा ताहिरे मिल्लत का ।
अब्दे वाहिद से मिलता है रिश्ता ताहिरे मिल्लत का ।।
हुस्ने नजर से जो भी देखे बस वो देखता रह जाए।
नूरानी पुरकैफ है ऐसा चेहरा ताहिरे मिल्लत का।।
गौस ए आजम के सदके में कितने ये मकबूल हुए।
पूरे भारत में बजता है ये ढका ताहिरे मिल्लत का।।
गुलफाम वाहिदी
करता रहूं हर वक्त जहां में चर्चा अब्दे वाहिद का।
मेरे मौला सब को बना दे शैदा अब्दे वाहिद का।।
आला हजरत खुद को भिखारी कहते थे इनके दर का।
जब से मिला है मेरे रजा को सदका अब्दे वाहिद का।।
तुफैल शम्सी गाजीपुरी
तेरे नाम का वजीफा सरे शाम चल रहा है।।
तेरे नक्श पा पे तेरा यह गुलाम चल रहा है।।
हम कैसे भूल जाये सुल्ताने करबला को ।
शब्बीर के बदौलत इस्लाम चल रहा है।।
तेरे दर में गदा हूं तेरा रहे सलामत ।
मुझे भीख मिल रही है मेरा काम चल रहा है।।
जिसे हो पीना हो वो आये मय मअरेफत शरीअत
अभी मैकदा खुला है अभी जाम चल रहा है।
ये तुफैल खान शम्सी नही करता जी हुजुरी।
है रसूल मेहरबां है मेरा काम चल रहा है।।
फरहान रजा बरकाती देहलवी
हर घड़ी रखते है अपने दिल के अन्दर वाहिदी।
मुस्तफा का इश्क और अल्लाह का डर वाहिदी।।
गर्दिशे दौरां मेरे घर की तरफ आना नही।
जान ले इतना कि अब है मेरा घर घर वाहिदी।।
बिलग्राम आकर अली के लाडले के उर्स में ।
देखते हैं खुल्द का हर वक्त मन्जर वाहिदी।।
कामयाबी सिर्फ दुनिया तक नही महदूद है।
हश्र में पायेगें जन्नत और कौसर वाहिदी।।
कहिए तो कुरआन सर पर में रखके येे मिशरा पढ़ूं।
अपने दिल esa रखते इश्के 72 वाहिदी ।।
सय्यदी ताहिर मियां ने कर लिया जिनकोे मुरीद।
उनके दिल को कर दिया ताहिर व ताहर वाहिदी।।
साहिबे सज्जादा हैं जो सय्यदी हजरत सुहैल ।
नजदियों को चुभ रहें हैं बनके खन्जर वाहिदी।।
सय्यदी रिजवाने मिल्लत हजरते सय्यद सईद ।
ले चलेगें खुल्द में मुझको बनाकर वाहिदी।।
गौस के प्यारे जनाब मीर तय्यब के तुफैल।
बनके रहते हैं मुकददर का सिकन्दर वाहिदी।।
तस्लीम रजा वाहिदी
सरकार वाहिदी सरकार वाहिदी सरकार वाहिदी सरकार वाहिदी
इक बार नही कहना सौ बार वाहिदी सरकार वाहिदी सरकार वाहिदी
मगता तुम्हारे दर आया बहुत पुराना कर दो करम खुदारा मर जायेगा दिवाना।
मुश्किल को मेरी आशां कर दो वाहिदी सरकार वाहिदी सरकार वाहिदी ।।
मुश्किल हुई हैं आशां जिसने भी दिल लगाया उसने भी दो जहां की है नेअमतों को पाया ।
सर पे तनी है हश्र में चादर ये वाहिदी सरकार वाहिदी सरकार वाहिदी ।।
चेहरा तुम्हारा ऐसा जैसे है चांद हो तारे ताहिर मियां तुम्हारे हम लोग हैं दिवाने।
दिल में मेरे बसी है सूरत ये वाहिदी सरकार वाहिदी सरकार वाहिदी ।।
अजीम अनवर
चरागे इश्क जल रहे हैं वाहिदी के नाम सेे
गुलाम सब मचल रहे हैं वाहिदी के नाम से
खुशी में सब उछल रहे हैं वाहिदी के नाम से
जलने वाले जल रहेे हैं वाहिदी के नाम से
फकत में एक ही नही कि जिसपे इनका है करम
करोड़ो लोग पल रहे हैं वाहिदी के नाम से
निकल रहे हैं वाहिदी का नाम लेके हर जगह
तो हाथ से भी टल रहे है वाहिदी के नाम से
अजीम तुम तो कुछ नही तुम्हारी क्या विसात है
तुम तो आज चल रहे हो वाहिदी के नाम से
अनस रजा
हुब्बे सरकार से रौशन मेरा सीना करदे
दिल को काअबा और कलेजे को मदीना कर दे
साजिद रजा शमीमी सुल्तानपुरी
दरबारे बिलग्राम से बो रौशनी मिली
दुनिया का रंज दूर हुआ और खुशी मिली
अल्लाह का करम है अता गौस पाक की
निस्वत हमे मिली भी वो वाहिदी मिली
ढूंढा है जब भी ताहिरे मिल्लत की जात को
हर वाहिदी के कल्ब में जल्वागरी मिली
चेहरे में उनके जज्ब था नूरे खुदा का नूर
देखा है जब भी उनको बड़ी सादगी मिली
कैसे कहें कि ताहिरे मिलल्त नही रहे
बेटों में उनके हमे वही रौशनी मिली
जिस पर निगाह पड़ते ही याद आता था खुदा
ताहिर मियां के चेहरे के वो दिलकशी मिली
साजिद शमीमी तुझको कोई जानता न था
जब आ गया यहां तो नई जिंदगी मिली
तुफैल शम्सी गाजीपुरी
खुदा ने आपको वख्शी वो अजमत ताहिरे मिल्लत
नबी से आपकी है खाश निस्वत ताहिरे मिल्लत
मुरीदों की निगाहें इसलिए बैचेन रहती है
तुम्हारे पास हो फिर से ज्यादा ताहिरे मिल्लत
तमामी अहले सुन्नत पर गमों का असमां टूटा
हुई जब आपकी दुनिया से रहलत ताहिरे मिल्लत
कारी शकील मीराई
फज्ले रब ताअला है वाहिदिया आंगन में
मुस्तफा का जलवा है वाहिदिया आंगन में
फैज़ मीर तययब का बटता है यहां हर दम
मंगता राजा बनता है वाहिदिया आंगन में
आल भी मुहम्मद के सुथरे बनके लेटे हैं
सययदों का मेला है वाहिदिया आंगन में
ये हैं ताहिरे मिल्लत इनका हर सू शोहरा है
क्या हसी नजारा है वाहिदिया आंगन में
ये शकील मीराई लखनवी भी है हाजिर
मनकबत जो पढ़ता है वाहिदिया आंगन में
सईद अख्तर
मेरा तन वाहिदी मेरा मन वाहिदी रूह को जो मिला वो वदन वाहिदी
इनके रौशन जमाने के अहवाल हैं इसमें बैठे हुये कुत्बो अब्दाल हैं
कितनी पाकीजा अन्जुमन वाहिदी मेरा तन वाहिदी मेरा मन वाहिदी
रहमते उस पे अल्लाह बरसायेगा गुलशनों की तरह घर महक जायेगा
बनके आये जो घर में दुल्हन वाहिदी मेरा तन वाहिदी मेरा मन वाहिदी
दौस पर वो हवाओ के चलते रहे नज्दीयत के सरों को कुचलतेे रहे
जिन चरागों से निकली किरन वादिही मेरा तन वाहिदी मेरा मन वाहिदी
ताहिरी माह पारे हैं सययद सुहैल देखिए कितने प्यारे हैं सययद सुहैल
ये बढ़ाते हैं मिशन वाहिदी मेरा तन वाहिदी मेरा मन वाहिदी
सुफियान वाहिदी
दरगाहे बिलग्राम के रूहेरवा चले
अफसोस हमको छोड़ के ताहिर मियां चले
निस्वत तो देखो माहे मुहर्रम की सात को
चरखे हुसैनियत के वो महरे अयां चले
वो नरम नरम लहजा वो गुलसाज गुफतगू
रोते है जान व दिल कि वो शीरी जवां चले
बेचैन है तमाम व मुहिव्वान खानकाह
हर आख्ंा ढूंढती है कि हजरत कहां चले
अक्श व जमाल वाहिद व तययब थी जिनकी जात
बागे शरफ वो गुले आली निशां चले
मो. अली फैजी
रजा ने इसको ही जन्नत की सरजमीं लिखा
वो जन्नती हैं जो वाहिद नगर में रहते हैं
मेरी निगाह को कश्मीर किसलिए भाए
हुजुर ताहिरे मिल्लत मेरी नजर में रहते हैं
खुदा ए पाक ने बख्शे सुहैल ए मिल्लत को
वे हौसले जो शेरे बबर में रहते हैं
सुहैल मिल्लत व रिजवान और सईद अख्तर
ये नूरी लोग हैं नूरानी घर में रहते हैं
व इनकी उंगली को बख्शे हैं मीर तययब ने
कमाल जो किसी तीरे तवर में रहते हैं
सहे नसीम के सरदार ताहिरे मिल्लत
हमारे दिल में हमारे जिगर में रहते हैं
यहां उर्स के लंगर में ऐसी लज्जत है
पूरा साल हम इसके असर में रहते हैं
नबी आल हैं इजहार ये सभी सययद
रहके दुनिया में जन्नत के घर में रहते है।
2022
तुफैल शम्शी गाजीपुरी
मरहबा मरहबा मेरे लब पर आज नगमा है ताहिर मियां का
क्यों न खुशियां मनाये दिवाने उर्स आया है ताहिर मियां का
उनके नाना रसूले खुदा है और दादा अली मुर्तजा है
जिक्र कुरआं में आया है जिसका वो घराना है ताहिर मियां का
लाई हमको यहां आज किस्मत लिख गये हैं रजा जिसको जन्नत
देखिए बागे जन्नत के अन्दर आस्ताना है ताहिर मियां का
मीर सययद सुहैल और रिजवां चाहे सययद सईद को देखो
तीनों शहजादों में साफ अक्श मिलता है ताहिर मियां का
शाने आलम मसूदी बहराइची
तेरे चश्मे इनायती की बदौलत ताहिरे मिल्लत
मुझे हासिल हुई तौकीर व इज्जत ताहिरे मिल्ल्त
मदीने के तसव्वुर से मेरे दिल में उजाला है
करम फरमाइये कर लूं जियारत ताहिरे मिल्लत
यहां पर ख्वाजा ए अजमेर फैजान बटता है
सजाये हैं यहां दरबार रहमत ताहिरे मिल्लत
तुम्हारा चाहने वाला यहां पर कल चला आया
तुम्हारी है ये एक अदना करामत ताहिरे मिल्लत
बुलाकर खानकाहे वाहिदी में अपने रिन्दों को
पिलाते हैं मये इश्के रिसालत ताहिरे मिल्लत
मुझे क्या चाहिए क्या मांगने आया हूं में दर पर
अयां है आप पर सारी हकीकत तािहरे मिल्लत
तुम्हारा दर न छोड़ेगें तुम्हारा दर न छोड़ेगें
हमे बचपन से है तुमसे अक़ीदत ताहिरे मिल्लत
सुहैल मिल्लत व रिजवाने मिल्लत और सईद अख्तर
सभ्ंााले है तेरी इल्मी विरासत ताहिरे मिल्लत
तुम्हारा कोई भी हामी न होगा नजदियों सुन लो
करेंगें हश्र में मेरी हिमायत ताहिरे मिल्लत
तुम्हारे दर की निस्वत से यकीनन शाने आलम को
मिला है दामने ताजे शरीअत ताहिरे मिल्लत
असद इकबाल कलकत्तवी
बिलग्राम बिलग्राम बिलग्राम बिलग्राम
कभी ये आफताब है कभी ये माहताब है बिलग्राम लाजबाब है
उमर रजा हसमती
कहता है ये हर शैदा उर्से वाहिदी आया
लेके गौस का सदका उर्से वाहिदी आया
गर्दिशे जमाने की उनको छू नही सकती
जिनके लब पे है शजरा उर्से वाहिदी आया
फैज साहे बतहा से आज मीर तययब का
जगमगाता है रौजा उर्से वाहिदी आया
सलीम रजा पीलीभीती
आ गया उर्से वाहिदी तययबी ताहिरी
शौक से इसमेें हर साल आयेगें हम जबीने मुहब्बत झुकाएंगे हम
तययबी ताहिरी फैज पायेगें हम अपनी तकदीर को जगमगायंे हम
हजरते मीर वाहिद का फैजान है इनके सदके मिली कादरी शान है
पढ़के सबअ सनाबिल बिलयकीं हो गया मीर अहले सुनन कामयाब है।
2023
परवेज वाहिदी खीरी
वा खुदा सबसे जुदा ताहिर मियां
मीर वाहिद की दुआ ताहिर मियां
जिनसे हर दम फैज पाते हैं सभी
हां वही हाजत रवां ताहिर मियां
जिनके वालिद हैं वली सुथरे मियां
और शहजादे वली ताहिर मियां
क्यों न दानिश तुम कहो हर दम यही
हैं हमारे पेशवा ताहिर मियां
फरहान आलम पलियावी
अताए शाहे पयम्बर हैं ताहिरे मिल्लत
जहां में अफजल व बरतर हैं ताहिरे मिल्लत
दिवाने आपके घर घर हैं ताहिरे मिल्लत
हर एक गुलाम के लब पर है ताहिरे मिल्लत
यह खास फैज है सरकार मीर तययब का
जो सारे जग में मुनव्वर है ताहिरे मिल्लत
हैं जिनके लख्ते जिगर हजरते सुहैल मियां
वो बिलग्राम के रहबर हैं ताहिरे मिल्लत
किये हैं सबके मुनव्वर कल्ब जो ये खालिद
वही तो वाहिदी अख्तर हैं ताहिरे मिल्लत
गुलाम अहमद रजा मनकापुरी
सखावत का समन्दर आस्ताना अव्दे वाहिद का
लुटाता है गरीबों पर खजाना अव्दे वाहिद का
खजाने से रसूल्लाह के हिस्सा वो पाया है
जमाना खा रहा है आज टुकड़ा अव्दे वाहिद का
बने हैं आज दुल्हा और बराती औलिया अल्लाह
फरिश्ते से खुल्द से लाये हैं सेहरा अव्दे वाहिद का
जो दुश्मन अव्दे वाहिद का है वो दुश्मन खुदा का है
वो है अल्लाह वाला जो है शैदा अव्दे वाहिद का
तुफैल शम्सी गाजीपुरी
ईद है अब्दे वाहिद के अंगना फर्श के अर्श तक रौशनी है
बट रहा है मुहम्मद सल0 का सदका अब्दे वाहिद की शादी रची है
आज तैबा से सरकार आये साथ में हैं चारो यार आये
आज महकी हुई हैं फजाये नूर की सर पे चादर तनी है
गौस ए आजम भी तशरीफ लाये और ख्वाजा पिया साथ आए
नाज कीजे मुकददर पे अपने देखिए किसकी जलवागरी है
ये भी सच है नही कोई किस्सा असल में है वही मन्नो सलवा
इसलिए दाल रोटी की मुझको साल भर याद तड़पा रही है
हजरते अब्दे वाहिद के सदके मीर तययब व ताहिर के सदके
आके देखो जरा इस गली में खुल्द की ये गली लग रही हैं।
अहमदुल फत्ताह फैजावादी
वाहिदी तययबी ताहिरी वाहिदी तययबी ताहिरी
रश्के बागे इरम है तुम्हारी गली वाहिदी तययबी ताहिरी
काबिले दीद है बागे जन्नत निशां तहनियत लिख रही है बहारे जिनां
उर्से वा फैज में बूड़े बच्चे जवां कह रहे हैं सभी झूमकर बस यही
वाहिदी तययबी ताहिरी वाहिदी तययबी ताहिरी
देखकर इज्जत व शौकत व बिलग्राम कह गये हैं रजा सुन्नियों के इमाम
मन्नो सलवा यहां के हैं खुवजो एताम चल रहा है यहां लंगरे कादिरी वाहिदी तययबी ताहिरी वाहिदी तययबी ताहिरी
बिलयकीं बिलग्राम जन्नत निशां जर्रे जर्रे यहां के है रश्के जिनां
है रिवायत असलाफ की पासवां मीर सययद सुहैल तेरी सज्जादगी
वाहिदी तययबी ताहिरी वाहिदी तययबी ताहिरी
वाहिदी तययबी दर है बावे सखा एक लम्हा नही बल्कि सुबह शाम
बट रहा यहां बाखुदा बा खुदा सदके हसनैन शाने मौला अली
मसलके आला हजरत पे कायम रहो बस इसी पे जियो और इसी पर मरो
नजदियों से कोई राब्ता मत रखो पहले मसलक है चिश्ती कादरी
वाहिदी तययबी ताहिरी वाहिदी तययबी ताहिरी
अपने दामन को फैलाये आबिद रजा मीर वाहिद तेरे दर पेे है आ गया
बख्श दो इसको भी फैज ए इल्मे रजा उम्र ये करे नस्रदीने नबी
वाहिदी तययबी ताहिरी वाहिदी तययबी ताहिरी
अम्बर मुशाहदी
ताहिर की गली है मेरे ताहिर की गली है अजमत ये सुल्हाड़ा को मदीने से मिली है
अब्बास अलमदार यहां आये हुए हैं हसनैन करीमैन को भी लाये हुए हैं
लगता है ये हर एक सह पे चढ़ा रगें अली है ताहिर की गली है मेरे ताहिर की गली है
सरकार के प्यारों का यहां आज है जलसा तशरीफ यहां लाये हैं बगदाद के राजा
यानि यहां आया हुआ हर एक वली है ताहिर की गली मेरे ताहिर की गली है
खुसरो व निजाम आये हैं और साबिरे कलियर दस्तारे सदारत है सजी ख्वाजा के सर पर
महसूस ये होता है कि ख्वाजा की छठी है ताहिर की गली मेरे ताहिर की गली है
मरहरा के सादात लिए आये हैं बरकात अब काल्पी बांसा मासौली की करें बात
मैदानपुरा तक ये पहुंची हे ये बात ताहिर की गली है मेरे ताहिर गली है
है मेरे सईद अख्तर व रिजवान का चेहरा रौशन है बहुत साहिबे सज्जादा का चेहरा
अजदाद के जलवों की यहां जलवागरी है ताहिर की गली है मेरे ताहिर की गली है।
क्या शक है कि कहते हो यही ताजे शरीअत बटता है शबो रोज यहां जामे तरीकत
हा सबअे सनाबिल भी इसी दर से मिली है ताहिर की गली है मेरे ताहिर की गली है।
लंगर में यहां बैठ के खाया हे रजा ने अम्बर ये जमाने को बताया है रजा
ये दाल ये रोटी यहां जन्नत से मिली है ताहिर की गली है मेरे ताहिर की गली है
साजिद रजा शमीमी सुल्तानपुरी
एक दिवाना यह कहता चला वाहिदी तययबी ताहिरी
आ गया उर्स फिर आ गया वाहिदी तययबी ताहिरी
नामे सरवर सुनाते रहे दामने दिल बिछाते रहे
हमको फैजान मिलता रहा वाहिदी तययबी ताहिरी
उसपे ऐसा करम हो गया दूर हर एक गम हो गया
जिस गर्दन में पटटा पड़ा वाहिदी तययबी ताहिरी
मीर सययद सुहैल आप हैं अपने अजदाद के जा नशीं
ताज सर पर सजाया गया वाहिदी तययबी ताहिरी
होगी नाते नबी मनकबत फिर पढ़़़ी जायेगी
धूम से उर्स होगा सदा वाहिदी तययबी ताहिरी
शानेे आलम मसूदी
है कितना तययब व ताहिर घराना अब्दे वाहिद का
हुसैन ए पाक का नाना हे नाना अब्दे वाहिद का
खुदा रखे सलामत आस्ताना अव्दे वाहिद का
है मगतों के लिए ये दर ठिकाना अब्दे वाहिद का
ताअल्लुक हे बड़ा गहरा यहां का शहरे तैबा से
कभी कम हो नही सकता खजाना अब्दे वाहिद का
सुनो यूं ही नही खुशहाल है ये जिन्दगी अपनी
यकीनन मेरे घर है आना जाना अव्दे वाहिद का
सनद है बारगाहे है नूर से सबअ सनाविल की
न क्यूं कर मुत्तहिद हो ये जमाना अब्दे वाहिद का
कभी इस दर का मगता कैसे खाली लौट सकता है
करम तो ढूंढता है बहाना अब्दे वाहिद का
इमामे अहले सुन्नत की नजर में मन्नो सलवा है
ये पानी अब्दे वाहिद का ये खाना अब्दे वाहिद का
जहां ढलते है सिक्के सरकारे दो आलम के
सुल्हाड़ा में है ऐसा कारखाना अव्दे वाहिद का
वो चालिस क्या अस्सी हकदार दुनियां में
है जिनके नूरी सामियाना अब्दे वाहिद का
रेहान शाहजहांपुरी
फैली है इसलिए चार सू रौशनी उर्स है वाहिदी तययबी ताहिरी
इसलिए आये हैं देने सब हाजिरी वाहिदी तययबी ताहिरी
मीर तययब के ताहिर के आशिक बनो जान व दिल माल व जर उनपे कुरवां करो
गम मिटेंगें सभी और मिलेगी खुशी उर्स है वाहिदी तययबी ताहिरी
आला हजरत ने जन्नत बताया इसे इस जमी से मोहब्बत करो दोस्तो
आओ जन्न्त में हो जाओगे जन्नती उर्स है वाहिदी तययबी ताहिरी
महशर बरेलवी
गुलामे बिलग्रामी जिसके माथे पर लिखा होगा
हवादिस से मुसीबत से वो तूफां से बचा होगा
तेरी यादों में जो आंसू जमी पर गिर गया होगा
कमर वो बन गया होगा या तारा बन गया होगा
तुम्हारे दर पे आकर जो भिखारी मांगता होगा
सखावत से तुम्हारी उसका कांसा भर गया होगा
तेरे दरबार की रानाईया जो देखता होगा
जमाले शहरे बतहा मजा उसको मिला होगा
सखावत देखकर दिल को मेरे महसूस होता है
तुम्हारे आस्ताने से ही महशर का भला होगा
अब्दुल वकील मुबारकपुरी
अहले हक की दास्ताने गुलफसां है बिलग्राम
अजमते इस्लाम का रौशन निशां है बिलग्राम
मारेफत की इल्म इरफान के तौहीद के
बा कमाल व सुनहरी दास्तां है बिलग्राम
पत्थरों से भी नही टूटे हैं जिनके आईने
ऐसे आईनागरों का आस्तां है बिलग्राम
फैली है हर सू तेरे सबअ सनाबिल की जिया
फैज का तेरे सरो पर सायबा है बिलग्राम
नईम वारसी बरेली शरीफ धौरा
सरकार का है फैजान ये वाहिदी फैजान है ये तययबी फैजान
हक ने है तेरे चारो तरफ ढंके बजाये अब किसमें ये जुर्ररत है तेरी शान घटाये
मकरूज मुस्लमा हे तेरे मीर गिरामी
दिल मुर्दा दिलों को हे तूने जिलाये
आलिम भी मुहदिस्सम भी फकीह और हो सूफी
गुल हो तो तेरे बाग में तेरे खिलाये
तस्नीफ लतीफात की है सबअ सनाबिल
आलम सिम्त हर है एक धूम मचाये
सुयेब रजा बरेली शरीफ
आ गया उर्से वाहिदी आ गया उर्से वाहिदी
अल्लाह का करम है अता उर्से वाहिदी
सरकारे दो जहां की रजा उर्से वाहिदी
सययद सुहैल शाह का दीदार हो गया
बरकात की वजह का बना उर्से वाहिदी
जन्नत सी बिलग्राम की लगती है रौनके
जन्नत का लेके आया पता उर्से वाहिदी
इस्राईल रागिब
बहुत नाम उंचा है ताहिर मियां का
जमाने में जलवा है ताहिर मियां का
मेरे घर में होती है रहमत की बारिश
मेरे घर में तोहरा है ताहिर मियां का
नजर आ रही है मुझे मेरी मंजिल
निगाहो में रौजा है ताहिर मियां का
मुझे कब्र की तारीखी का नही डर
मेरे पास शजरा है ताहिर मियां का



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