COMMON SERVICE CENTRE

कमर जन सुविधा केंद्र कटिया कम्मू शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश भारत

नियर नूरी जमा मस्जिद E-MAIL- sherjsk.khan@outlook.com
WELCOME TO KAMAR JAN SUVIDHA KENDRA

मनक़बत-ए-साबिर पाक रहमतुल्लाह अलैह

 मनक़बत-ए-साबिर पाक रहमतुल्लाह अलैह 


सुकूं तुमको न जब आये दर-ए-साबिर पे आ जाना।

अगर दिल गम से घबराये दर-ए-साबिर पे आ जाना।


ये चौखट चूम लेना सर पे रखवा लेना चादर को 

कोई जब दर्द तड़पाये दर-ए-साबिर पे आ जाना।


ये बो दर है जहां पर दूर होती हैं वलायें सब

नजर जब तुमको लग जाये दर-ए-साबिर पे आ जाना।


यहाँ फ़ैज़-ए-इलाही है, यहाँ नूर-ए-मदीना है,

कोई मुश्किल अगर आए, दर-ए-साबिर पे आ जाना।


कलियर की पाक गलियों में, करम की धूप बिखरी है,

नसीबा जब भी शरमाए, दर-ए-साबिर पे आ जाना।


जो झुककर माँगता रब से, वही झोली को भर लाता,

उम्मीदें जब भी थक जाएँ, दर-ए-साबिर पे आ जाना।


कोई जिन्नात क्या आए, परेशाँ कर नहीं सकते,

करम साबिर जहाँ छाए, दर-ए-साबिर पे आ जाना।


यहाँ हर साँस में रहमत, यहाँ हर दिल को राहत है,

करम की आस जग जाए, दर-ए-साबिर पे आ जाना।


जो सच्चे दिल से आता है, कभी महरूम नहीं जाता,

मुरादें जब भी रुक जाएँ, दर-ए-साबिर पे आ जाना।


करम की एक नज़र भर से, बदल जाए मुक़द्दर भी,

अँधेरा जब तुझे डराए, दर-ए-साबिर पे आ जाना।


सलाम उन पर हमेशा हो, करम जिनकी विरासत है,

ज़माना जब भी ठुकराए, दर-ए-साबिर पे आ जाना।



बस इतनी इल्तिज़ा है, शेर की रहे दिल में अदब उनका,

बुलावा जब भी फिर आए, दर-ए-साबिर पे आ जाना।

Share:

No comments:

Post a Comment

अपना सुझाव दर्ज करें l Please Enter Suggestion

Search This Blog

Contact Form

Name

Email *

Message *